76, Kalka Mata Mandir Road, Ganesh Nagar, Pahada, Udaipur, Rajasthan - 313001

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

प्राचीन इतिहास में अर्थात् ऋषि-मुनियों के काल में भारतदेश को आर्यावर्त के नाम से जाना जाता था | उस समय भारतीय संस्कृति नैतिक एवं धर्मपरायण थी। प्रत्येक प्राणी अपने कर्तव्य का पालन भली-भॉति एवं सोच विचार कर करता था, ऋषियों मुनियों ,सन्त-महात्माओं , बुजुर्ग एवं महिलाओं को आदर्श मानकर इन सभी का सम्मान करता था । समाज की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिये ऋषि-मुनियों ने समाज में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं सूद्द चारों वर्णों की एक मर्यादा कायम की, चारों वर्णों के प्राणियों के लिये कर्तव्य-परायणता एवं धर्म पालन का मार्गदर्शन व सम्मान का पाठ सिखाया जिससे समाज का पतन न हो । सभी वर्ग के प्राणी अपने कर्तव्य के अनुसार पारस्पर भाई-चारे की भावना से एक-दूसरे की आज्ञा का पालन करते थे तथा सम्मान की दृष्टि से देखते थे | समाज के रिश्ते को एक मजबूत कड़ी में बांध कर अपने कर्तव्य का निर्वाह करते थे | महिलाओं को एक उच्च श्रेणी का दर्जा दिया जाता था किसी की भी पत्नी, बहूं, बेटी , बहन अपने घर की बहूं-बेटियों की तरह ही मानते थे । ये सब घर की लक्ष्मी हैं, नारी का अपमान करना ही लक्ष्मी का अपमान करना है, इसी भावना को ध्यान में रखते हुए, महिलाओं को सभी त्यौहारों पर सम्मान के रूप में बुजुर्गों द्वारा भेंट दी जाती थी जिससे आने वाली पीढ़ी इस मर्यादा को कायम रखें कि नारी ही सृष्टि की रचयिता है, इसके बिना संसार नहीं चल सकता। इसमें नारी की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है,जो घर ,समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देती है । यहीं पूर्वजों ने मर्यादा के अन्तर्गत सभी को सौम्य ,सदाचार ,सहिष्णुता ,पराकाष्ठा कर्तव्य पालन आदि का उपदेश दिया तथा सार्वजनिक जीवन में उतारा । लेकिन आज के भौतिकवाद एव् आर्थिक युग में नैतिकता एवं धर्म परायणता का पतन हुआ है । समाज में विकृति फैलती जा रही है तथा लिंग अनुपात में दिनों दिन गिरावट बढ़ती जा रही है । कई बड़े वीमत्स दृश्य अखबारों के माध्यम से देखते है कि नाबालिंग बालिकाओं के साथ दुष्कर्म, बलात्कार जैसे कृत्य दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं व भ्रूण हत्या, जन्म के बाद नवजात शिशु को झाड़ियों में फैंक देना, अस्पताल में छोड़कर चले जाना या गन्दे नालो में फैंक देना जिसे श्वान एवं चूहे नोंच कर खा रहे हैं, ऐसा दृश्य हृदय को दहला देता है कि आज समाज में क्या हो रहा है? यदि यही स्थिति रही तो समाज में अस्थिरता फैल जायेगी।

आज देश के सामने विकट समस्या है कि लड़कियों का अनुपात लड़कों की अपेक्षा कम होता जा रहा है। इस दिशा में काम करने हेतु गुजरात, मध्यप्रदेश संस्कारों ने बेटी बचाओं अभियान चलाया था जिसके अनुकूल परिणाम सामने है। इन दोनों राज्यों में 1000 लड़कों की संख्या के साथ 880 लड़कियाँ भी है और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे देशव्यापी स्तर पर शुरू किया है। इस योजना का नाम बेटी बचाओं- बेटी पढ़ाओ किया गया है क्योंकि केवल बेटी को जन्म देना ही पर्याप्त नहीं उसे इस दुनिया मैं जीने के लिए काबिल बनाना मीं माता पिंता का कर्तव्य है अगर बेटी पढ़ी लिखी होगी तो दो परिवार को संस्कारित बना सकेगी। बेटी केवल एक परिवार का दीपक नहीं होती वह दो परिवार का नाम रोशन करती है बेटियों को कम आंकने वालों जरा अपनी माँ की तरफ देखो यह वहीं हैं जिसने तुम जैसों को जन्म देकर इतना बड़ा बनाया और आज तुम्ही उसके अस्तित्व को मिटाने चले हो।

कन्या भ्रूण हत्या एक बड़ा घिनौना अपराध है यह करके मनुष्य आज और कल दोनों को अंधकारमय बना रहा हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
    बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ एक ऐसी योजना है जिसके जरिये देश की बेटियों की स्थिति मजबूत होगी। बेटा - बेटी के बीच का भेद मिटेगा और मनुष्य जाति को आभास होगा कि एक बेटी में भी वहीं गुण है जो बेटे में है फर्क परवरिश एवम् दृष्टिकोण का है अत: बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को सहयोग करें और बेटी के अनुपात को बढ़ायें ।
    हरियाणा के पानीपत में 22 जनवरी 2015 को पीएम नरेन्द्र मोदी ने दुबारा बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओं के नाम से एक सरकारी योजना की शुरुआत कीं। भारतीय समाज में लड़कियों की दयनीय दशा को देखते हुए इस कार्यक्रम की शुरुआत की गयी। आँकड़ों के अनुसार 1991 में 0.6 वर्ष के उम्र के हर 1000 लड़कों पर 945 लड़कियाँ थीं जबकि 200। में लड़कियों कीं संख्या 927 पर और दुबारा 2011 में इसमें गिरावट होते हुए ये 1000 लड़कों पर 918 पर आकर सिमट गयी। अगर हम सेंसस के ऑकड़ों पर गौर करें तो पाएँगे कि हर दशक में लड़कियों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज हुई है। ये धरती पर जीवन की संभावनाओं के लिये भी खतरे की निशान है। अगर जल्द हीं लड़कियों से जुड़े ऐसे मुदूदों को सुलझाया नहीं गया तो आने वाले दिनों में धरती बिना नारियों की हो जायेगी और कोई नया जन्म नहीं होगा।
    देश में लड़कियों के बुरे आँकड़ों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ योजना की शुरूआत की । ये बेहद प्रभावकारी योजना है जिसके तहत लड़कियों की संख्या में सुधार इनकी सुरक्षाएं, शिक्षाएं, कन्या श्रूण हत्या का उन्मूलन, व्यक्तिगत और पैशेवर विकास आदि का लक्ष्य पूरे देश भर में है। इसे सभी राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू करने के लिये एक राष्ट्रीय अभियान के द्वारा देश के 100 चुनिंदा शहरों में इस योजना को लागू किया गया है। इसमें कुछ सकारात्मक पहलू ये है कि ये योजना लड़कियाँ के खिलाफ होने वाले अपराध और गलत प्रथाओं को हटाने के लिये एक बड़े कदम के रूप में साबित होगा। हम ये आशा करते है कि आने वाले दिनों में सामाजिक , आर्थिक कारणों की वजह से किसी भी लड़की को गर्भ में नहीं माराा जायेगा, अशिक्षित नहीं रहेगी। अत: पूरे देश में लैगिक भेदभाव को मिटाना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं योजना द्वारा लड़कियों को आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह से स्वतंत्र बनाने का लक्ष्य है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ क्यूँ लागू की?

भारत देश में जनसंख्या तो बड़ी तादात में फैल रही हैं लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इस बढ़ती हुई जनसंख्या में लड़कियों का अनुपात कम होता जा रहा है। वर्ष 2001 में की गई गणना के अनुसार प्रति 1000 लड़कों में 927 लडकियाँ थी जो आँकड़ा गिरकर 2011 में 918 हो गया। आधुनिकीकरण के साथ-साथ जहाँ विचारों में भी आधुनिकता आनी चाहिए वहाँ इस तरह के अपराध बढ़ रहे हैं। अगर इसी तरह वर्ष दर वर्ष लड़कियों की संख्या कम होती रही तो एक दिन देश अपने आप ही नष्ट होने की स्थिति में होगा। अतः इस दिशा में लोगों को जागरूक बनाने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरूआत की गई है।

क्या है बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का मुख्य उद्देदय :-

- कन्या भ्रूण हत्या को रोकना - बेटियो की सुरक्षा

बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं न केवल कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए अपितु बेटियों की रक्षा के लिए भी शुरू किया गया है। आये दिन छेड़-छाड़, बलात्कार जैसे घिनौने अपराध बढ़ रहे हैं इनको नियंत्रित करने हेतु भी अहम् निर्णय लिए गए हैं। सरकार ने अपने बजट में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं योजना के लिए 100 करोड़ की शुरूआती राशि की घोषणा की है।

बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं योजना के अंतर्गत दी जाने वाली सुविधाएँ :-

- बेटी की सुरक्षा : आज महिलायें देश के किसी भी कौने में सुरक्षित नहीं है इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाये जा रहे है जिसके लिए 50 करोड़ का फंड दिया जायेगा, जिसमें मुख्यतः महिलाओं के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा दी जाएगी।
- अलर्ट बटन : एक बटन है जिसके जरिये संदेश/उमें हम, आवाज संदेश अवपबम उमेंहम साथ ही पाएं हमे के जरिये सुरक्षा हेतु मदद मांगने की सुविधा दी जाएगी।
- संकट प्रबन्धन केन्द्र : अगर कोई दुर्घटना हो गई है तो इस स्थिति में उचित कार्यवाही हेतु संकट प्रबन्धन केन्द्र की सुविधा दी जाएगी।
जनता की जागरूकता हेतु प्रयास : सरकार द्वारा योजनाये तो बहुत बनाई एंव लागू की जाती है पर जनता उन पर कितना ध्यान देती है इस दिशा में कोई उपयुक्त कार्य नहीं किये जाते इस हेतु कई विज्ञापन, स्लोगन एवम् पोस्टर बनाये गए है जिसके जरिये बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के प्रति जनता की जागरूकता बढ़े।
    बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना बहुत बड़े स्तर पर लागू की गई है। जिस तरह कोई नया ब्रांड लॉन्च किया जाता है उसी तरह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को लॉन्च किया गया।

कौन हैं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का ब्रांड एम्बेसडर -
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की सफलता के लिए और इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए इस योजना का ब्रांड एम्बेसडर बॉलीवुड महा नायिका माधुरी दीक्षित को बनाया गया। साथ ही दिल को छू जाने वाले विज्ञापन भी बन प्रधान देश में नारियों की स्थिति का चित्रण किया गया है। असल में मोदी जी का मानना है कि जब तक योजनाओं के प्रति जनता की जागरूकता नहीं होगी तब तक उस दिशा में सफलता पाना मुश्किल है। जब योजनाओं का बढ़ चढ़कर बखान नहीं होगा यह घर-घर का मुद्दा नहीं बन सकती। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना में देश का सहयोग दे एवं कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराध से बचे।

सुकन्या समृद्धि योजना : बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत दी जाने वालीं यह सबसे महत्वपूर्ण योजना है।

क्या है सुकन्या समृद्धि खाता/अकाउण्ट : यह एक बैंक खाता है जो 10 वर्ष से कम उम्र की बेटियों के लिए शुरू किया गया है। सुकन्या समृद्धि खाता/अकाउंट बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं योजना की सबसे महत्वूपर्ण कड़ी हैं जो कि कन्या के भविष्य को सुरक्षित हैं।

सुकन्या समृद्धि खाता/अकाउण्ट की विशेष सुविधा यह हैं कि इस खाते पर 9.1% / वार्षिक चक्रवर्ती ब्याज दिया जायेगा। यह दर बढ़ाया भी जा सकता है।

सुकन्या समृद्धि खाता/अकाउण्ट योजना एवं नियम :
योग्यता : सुकन्या समृद्धि खात १0 वर्ष से कम आयु की कन्या द्वारा खोला जा सकता है। बेटी की उम्र कम होने के कारण इस अकाउण्ट की देख रेख उसके माता-पिता द्वारा की जायेगी ऐसी सुविधा दी गयी है।
जरूरी कागज : सुकन्या समृद्धि खाता खोलने के लिए जरूरी कागजों की आवश्यकता होती है जिनमें :-
- बेटी का जन्म प्रमाण पत्र ,
- माता पिता या अन्य संरक्षक का एड्रेस प्रूफ एवम् परिचय पत्र

मुख्य बिंदु :
- सुकन्या समृद्धि खाते को खोलने के लिए इसमें 1000 रूपए की न्यूनतम राशि ली जाएगी जो कि खाते में ही जमा होंगे।
- प्रति वर्ष इसमें न्यूनतम 100 रूपये जमा करना अनिवार्य है अन्यथा इसे बंद कर दिया जायेगा। साथ हीं अधिकतम 150000 प्रति वर्ष की राशि तय की गई है।
- इस खाते के शुरू होने की तारीख से 14 वर्ष तक इसमें राशि जमा की जा सकती है। अतः 15 से 21 वर्श तक इस खाते में अन्य राशि जमा नहीं की जा सकती।
- लड़की की आयु 18 वर्ष हो जाने पर इस खाते से 50 प्रतिशत की राशि उसकी पढ़ाई एवं शादी के लिए निकाली जा सकती है।

सुकन्या समृद्धि खाते की वयस्कता : सुकन्या समृद्धि खाते को खोले की तारीख से 21 वर्ष तय की गई है जिसमें 14 वर्ष तक इस खाते में रूपये जमा करने की सुविधा दी गई है।

सुकन्या समृद्धि खाते का मुख्य लाभ : 21 वर्ष की अवधि के बाद इस खाते से रूपये प्राप्त होंगे। अगर इस खाते में वार्षिक 12000/- रूपये जमा किये जाते है तब यह 607128/- होंगे और अगर 150000 रूपये डाले जाते हैं तब वे 72 लाख होंगे। सुकन्या समृद्धि योजना, बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना के अंतर्गत शुरू की गई ऐसी योजना हैं जिसमें बेटियों के जीवन को सुधारने एवं भविष्य को सुरक्षित करने हेतु अहम् कदम लिये गये है। सुकन्या समृद्धि एक प्रकार का PPF खाता/अकाउण्ट हैं। जिसमें टैक्स एवम् इंटरेस्ट की विशेष सुविधायें दी गई हैं। 

16 मई 2016

उत्तर भारतीय विकास संस्थान

उत्तर भारतीय विकास संस्थान

सभी के लिए एक हार्दिक नमस्कार, यदि आप इस पृष्ठ पर पहुँचे हैं तो एक उच्च संभावना है कि आप वास्तव में हमारे और हमारे दर्शन के बारे में गहराई से जानना चाहते हैं। शुरुआत में, इस पृष्ठ को पढ़ने के लिए धन्यवाद। लेखक उत्तर भारतीय विकास संस्थान है। अब तक आप जानते हैं कि हम उत्तर भारतीय विकास संस्थान पिछले 21 वर्षों से जनता के विकास के क्षेत्र में काम करने वाले उच्च गुणवत्ता वाले पेशेवरों की एक टीम हैं। हमारी ताकत हमारी टीम है और हमारी पूरी कोशिश है कि हम हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।

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