76, Kalka Mata Mandir Road, Ganesh Nagar, Pahada, Udaipur, Rajasthan - 313001

प्रत्येक मनुष्य में एक प्रकार की स्वाभाविक जिजीविषा होती है। उसमें कुछ बनने की, कुछ कर गुजरने की | फर्क इतना ही है कि कुछ में कम, कुछ में तीव्र तथा कुछ में तीव्रतर। जिनमें यह भावना तीव्रतर हो जाती है वे व्यक्ति असाधारण, अतुल्य एवं अद्भुत हो जाते है। उनके लिए किसी राह की तलाश नहीं करनी पडती, बल्कि जिधर से, जहाँ से, वे चल पड़ते है, वहीं से राह शुरू हो जाती है। अतः वे नवीनता के सर्जक तथा लोगो के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणा के स्त्रोत बन जाते है। जिजीविषा की ये भावनाएँ आती है केवल शिक्षा से। शिक्षा को माध्यम चाहे माता पिता गुरू हों, चाहे अड़ोस पड़ोस अथवा शिक्षा संस्थान या महापुरूषों की जीवनियाँ आदि।| "सरस्वती देवयन्तो हवन्ते“ अर्थात आपको यदि देवत्व प्राप्त करना हो तो सरस्वती की (विद्या देवी) की आराधना करें। विद्या व्यक्ति को देव पद तक पहुँचाती है। 'विद्या ददाति विनयम्' विनयाद पात्रताम् | पात्रत्वाद , धनमाप्नोति, धनाधर्मः ततः सुखम ।। अर्थात विनम्नता, पात्रता, धन धर्म और सुखादि केवल विद्या (शिक्षा) से ही प्राप्त हो सकती है। शिक्षा का विशद् ज्ञान व्यक्ति को विद्वान बनाता है। उसकी मनीषा में अभिवृद्धि व्यक्ति को सुनागरिक बनाती है, सुनागरिक में राष्ट्रीयता की भावना कूट - कूट कर भरी होती है, अतः सुनागरिक से स्वस्थ सुदृढ़ और विकसित समाज को निर्माण होता है। सुगठित शक्तिशाली समाज विकसित एवं बलशाली, बलवान राष्ट्र का निर्माण करता है जिसका अनुकरण अन्य राष्ट्र करते है। आज जितने भी विकसित एवं शक्तिशाली राष्ट्र है उनकी राष्ट्रीयता की भावना ही मुख्य कारक है।
शिक्षित समाज का एकीकृत स्वरूप ही सच्चे अर्थो में संगठन या संस्थान कहलाता है। किसी भी संस्थान का संगठन मानव, समाज एवं राष्ट्रोत्थान के लिए ही किया जाता है। जिस राष्ट्र का व्यक्ति एवं समाज स्वस्थ (आर्थिक, शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक ) होग वह राष्ट्र अजेय एवं अन्य राष्ट्रो के लिए रोल मॉडल बन जायेगा।
उत्तर भारतीय विकास संस्थान समग्र शिक्षित सुपात्र एवं राष्ट्रीय भावनाओं से ओत प्रोत सुनागरिकों का पूर्णतया गैर राजनीतिक सामाजिक संस्थान है। उत्तर भारतीय पूरे दिलो दिमाग से यह महसूस करते है कि राजस्थान प्रदेश ने हमें बहुत कुछ दिया है। जन्म भूमि हमारी चाहे कहीं भी हो परन्तु हमारी कर्म भूमि राजस्थान की पावन धरा, वीरभूमी ही है, “ उपजत अनत, अनत सुख लहहीं “ के नियमानुसार समस्त उत्तर भारतीयों की उत्कट अभिलाषा यही है कि हम अपनी क्षमता, प्रतिमा एवं दक्षता का उपयोग राजस्थान के विकास के लिए करे। इसी लिए संस्थान का गठन आवश्यक हो गया और कई बुजुर्गों के सतत् प्रयत्न से उत्तर भारतीय विकास संस्थान गठित हुआ।
भावनाओं, संवेदनाओं के आधार पर किसी संस्थान या संगठन को गठन ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि आवश्यक होता है उसकी व्यावहारिक पृष्ठभूमी तैयार करना। अधिकाधिक संख्या में लोगो को जोड़ना और उनसे जुड़ना। लोगों में परिश्रम, सत्यनिष्ठा, समर्पण एवं राष्ट्रीयता और कर्मठता पैदा करना। मुझे खुशी है कि उत्तर भारतीय विकास संस्थान इसी दिशा में विगत 42 वर्षों से सतत् प्रयत्नशील है। शुरूआत उदयपुर जिले से की जा रही है। कार्य की सम्पूर्णता के लिए अध्यक्ष निवास जो कि सम्प्रति संस्थान को कार्यालय (सुरभि सदन, 42 - डिवाइन पब्लिक स्कूल के पास, गायत्री नगर, हिरण मगरी, सेक्टर न. 5, उदयपुर, मो. 94442 96769) भी है, से निम्न लिखित जोन में बाटँकर तथा प्रत्येक जोन के प्रभारी गण नियुक्त करके किया जा सकता है।
हम जितने ही अधिक लोगों से जुड़ेंगे, उतने ही अधिक सामाजिक सरोकारों से जुड़ेंगे विभिन्न परम्पराओं और संस्कृतियों से उत्तर भारत की गंगा जमुनी संस्कृतियों से तालमेल स्थापित कर सकेंगे। लोगों में स्वस्थ भावनाओं का संचार करने में सफलता प्राप्त कर सकेंगे और स्वस्थ समाज (चोरी, हत्या, अपरहण, रिश्वत, घोटालो आदि से विहीन समाज) की स्थापना कर सकेंगे।
समाज में शिक्षा के प्रचार प्रसार, पर्यावरण सुधार, स्वास्थ्य सुधार, लिंग परिक्षण, दहेज उत्पीड़न, महिल सशक्तिकरण, बेटी बचाओ, प्रौढ़ शिक्षा, मृत्यु भोज, मौताणा जैसी कुप्रथाओं को कम करने तथा जड़ से समाप्त करने के लिए उत्तर भारतीय विकास संस्थान कार्य करेगा। ग्रामीण क्षेत्रों एड्स अवेयरनेस, पर्यावरण से जुड़ी विभिन्न जानकारियाँ प्रदान करना, तम्बाकू सेवन से हाने वाले रोग एवं जागरूकता, ग्रामीण बच्चो के कुपोषण के कारणों पर अध्ययन एवं सरकारी सामंजस्य बिठाना, कन्याभ्रूण हत्या से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन करना, संगठन के बच्चों को अपनी शैक्षिक स्तर को श्रेष्ठता प्रदान करना, उन्हे हर साल मेरिट में स्थान पाने के लिए जागरूक करना आदि अनेकानेक प्रोजेक्ट पर संस्थान कार्य करेगा तभी संस्थान की उपादेयता सार्थक हो सकती है। संस्थान सर्व प्रथम संस्थान के सदस्यों के बच्चों में खेल, शिक्षा, रोजगार, उद्योग, व्यवसाय, समाज सेवा तथा राजनिति आदि विविध क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मक योग्यता हासिल करने के लिए जागरूकता पैदा करेगा। यही बच्चे आगे चलकर समाज एवं राष्ट्र के लिए उपादेय सिद्ध होंगे। बच्चों को बताया जायेगा कि “अपनी अच्छी या खराब शिक्षा के लिए आप खुद ही जिम्मेदार होंगे * इसलिए अच्छी से अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के लिए अथक प्रयास करें, संस्थान हमेशा आपके साथ है।
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