76, Kalka Mata Mandir Road, Ganesh Nagar, Pahada, Udaipur, Rajasthan - 313001

झीलों की नगरी - उदयपुर


उदयपुर बनास नदी पर, नागदा के दक्षिण पश्चिम में उपजाऊ परिपत्र गिर्वा घाटी में महाराणा उदयसिंह द्वितीय ने 1559 में स्थापित किया था । यह मेवाड़ राज्य की नई राजधानी के रूप में स्थापित किया गया था । यह क्षेत्र 12वीं सदी के मध्य तक भील प्रमुखों के शासन का क्षेत्र रहा था । गिर्वा पहले से ही कमजोर पठार चित्तौड़गढ. था जो चित्तौड़ शासकों के लिये अच्छी तरह से जाना जाता है । महाराणा उदयसिंह द्वितीय, तोपखाने यु़द्ध की 16 सदी के उपद्रव के बाद में, एक अधिक सुरक्षित स्थान पर अपनी राजधानी को स्थानांतरित करने के उद्देश्य से कुंभलगढ़ में अपने निर्वासन के दौरान फैसला किया। महाराणा उदयसिंह द्वितीय अरावली श्रंखला की तलहटी में शिकार करते हुए एक संत से भेट हुई और कहा कि जहॉं अपनी नई राजधानी शहर है, महल के निर्माण शुरू करने के लिये पिछोला झील के किनारे पूर्व दिशा चुनी है, लेकिन वारिश के मौसम में बाढ़ की आशंका थी । साधु ने राजा को आशीर्वाद दिया और यह अच्छी तरह से संरक्षित किया जायेगा और उसे आश्वस्त किया तथा मौके पर ही निर्माण करने के लिये राजा को निर्देशित किया । महाराणा उदयसिंह द्वितीय ने फलस्वरूप साइट पर एक निवास की स्थापना की । नबम्बर 1567 में मुगल बादशाह अकबर ने चित्तौड़ के पूरे किले को घेर लिया ।

सिसोदिया शासकों ने मुगल साम्राज्य कमजोर होने पर अपनी स्वतंत्रता प्राप्त की और चित्तौड़गढ़ को छोड़कर मेवाड़ पर पुनः कब्जा किया । उदयपुर एक पहाड़ी क्षेत्र है और भारी बख्तरबंद मुगल घोड़ों के लिये अनुपयुक्त होने के नाते सन् 1818 में ब्रिटिश काल में मेवाड़ भारत का एक राजसी राज्य बन गया था जो राज्य की राजधानी बना रहा । उदयपुर ज्यादा दबाब के बावजूद मुगल प्रभाव से सुरक्षित बना रहा । वर्तमान में, अरविंदसिंह मेवाड़ राजवंश के 76 वें संरक्षक है ।

उत्तर भारत


उत्तरी भारत में अनेक भौगोलिक क्षेत्र आते हैं । इसमें मैदान, पर्वत, मरूस्थल आदि सभी मिलते हैं । यह भारत का उत्तरी क्षेत्र है। प्रधान भौगोलिक अंगों में गंगा के मैदान और हिमालय पर्वतमाला आती है । यही पर्वतमाला भारत को तिब्बत और मध्य एशिया के भागों से पृथक करती है । उत्तरी भारत मौर्य, गुप्त, मुगल एवं ब्रिटिश साम्राज्यों का ऐतिहासिक केन्द्र रहा है । यहॉं बहुत से हिन्दू तीर्थ जैसे हरिद्वार, कुरूक्षेत्र,शाकम्भरी देवी सहारनपुर पर्वतों में गंगोत्री से लेकर मैदानों में वाराणसी तक हैं, तो मुस्लिम तीर्थ जैसे अजमेर आदि भी हैं । यहॉं विश्व धरोहर स्थल भी अनेक हैं, जैसे महाबोधि मंदिर, हुमायूं का मकबरा और सर्वश्रेष्ठ ताजमहल । भारत सरकार द्वारा परिभाषित उत्तरी और उत्तर-मध्य क्षेत्र में जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड,हरियाणा,पंजाब,राजस्थान, उत्तरप्रदेश,बिहार,मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा झारखंड राज्य आते हैं । यहॉं के प्रमुख शहरों में नई दिल्ली,कानपुर,जयपुर,लखनऊ,इंदौर,लुधियाना,चंडीगढ़ आदि आते हैं । यहॉं बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं हैं हिन्दी, पंजाबी, कश्मीरी,डोगरी,उर्दू,अवधी,मैथिली,अंग्रजी इत्यादि ।

यहॉं के मैदान सिंधु,गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा बहाकर लाये गये जलोट निक्षेप से बना है । इस मैदान की पूर्व से पश्चिम लम्बाई लगभग 3200 किलो मीटर है । इसकी औसत चौड़ाई 150 से 300 किलोमीटर है । जलोट निक्षेप की अधिकतम गहराई 1000 से 2000 मीटर है । उत्तर से दक्षिण दिशा में इन मैदानों को तीन भागों में बॉंट सकते हैं,जैसे-भाभर, तराई और जलोढ़ मैदान । जलोढ़ मैदान को आगे दो भागों में बॉटा जाता है- खादर और बॉगर । भाभर 8 से 10 किलामीटर चौड़ाई की पतली पट्टी है जो शिवालिक गिरपाद के समानांतर फैली हुई है । उसके परिणामस्वरूप हिमालय पर्वत श्र्रणियों से बाहर निकलती नदियॉं यहॉं पर भारी जल-भार, जैसे-बड़े शैल और गोलाष्म जमा कर देती हैं और कभी-कभी स्वयं इसी में लुप्त हो जाती है । भाभर के दक्षिण में तराई क्षेत्र है,जिसकी चौड़ाई 10 से 20 किलोमीटर है । भाभर क्षेत्र में लुप्त नदियॉं इस प्रदेश धरातल पर निकलकर प्रकट होती हैं क्योंकि इनकी निश्चित वाहिकाएं नहीं होती, ये क्षेत्र अनूप बन जाता है, जिसे तराई कहते हैं । यह क्षेत्र प्राकृतिक वनस्पति से ढका रहता है और विभिन्न प्रकार के वन्य प्राणियों का घर है। तराई से दक्षिण में मैदान हैं जो पुराने और नये जलोढ़ से बना होने के कारण बॉगर और खादर कहलाता है ।

इस मैदान में नदी की प्रौढ़ावस्था में बनने वाली अपरदनी और निक्षेपण स्थलाकृतियॉं, जैसे- बालू-रोधिका, विसर्प, गोखुर झीलें और गंुफित नदियॉं पाई जाती हैं । ब्रह्मपुत्र घाटी का मैदान नदीय द्वीप और बालू-रोधकाओं की उपस्थिति के लिये जाना जाता है । यहॉं ज्यादातर क्षेत्र में समय पर बाढ़ आती रहती है और नदियॉं अपना रास्ता बदलकर गंुफित वाहिकाएं बनाती रहती हैं । उत्तर भारत के मैदान में बहने वाली विशाल नदियॉं अपने मुहाने पर विश्व के बड़े-बड़े डेल्टाओं को निर्माण करती हैं, जैसे-सुंदर वन डेल्टा । सामान्य तौर पर यह एक सपाट मैदान है जिसकी समुद्र तल से औसत ऊॅचाई 50 से 100 मीटर है । हरियाणा और दिल्ली राज्य सिंधु और गंगा नदी तंत्रों के बीच जल-विभाजक है । ब्रह्मपुत्र नदी अपनी घाटी में उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती है । परन्तु बंगलादेश में प्रवेश करने से पहले धुबरी के समीप यह नदी दक्षिण की ओर 900 मुड़ जाती है । ये मैदान उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी से बने हैं । यहॉं कई प्रकार की फसलें, जैसे- गेहूॅ,चावल,गन्ना और जूट उगाई जाती है । उत्तर भारत में जनसंख्या का घनत्व ज्यादा है ।

उत्तर भारतीय विकास संस्थान


वर्ष  1999

उत्तर भारतीय विकास संस्थान की स्थापना दिनांक 24.10.1999 को माननीय पितामह व संस्थान के संरक्षक स्व. श्री रजनीकान्त वर्मा सा. के कुशल नेतृत्व एवं सानिध्य में स्व. श्री हीरालाल यादव ने की थी जो संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष थे | स्व. श्री हीरालाल जी ने अपना अधिकतर जीवन संस्थान के लिए समर्पित किया | अतः संस्थान के इतिहास में उनका नाम हमेशा स्मरणीय रहेगा |

वर्ष  2001

स्व. श्री हीरालाल जी के निधन के पश्चात् संस्थान की वागडोर डॉ. जे. आर. यादव सा. ने 2001 में अध्यक्ष के रूप में संभाली | उन्होंने इस पद पर चार साल से कुशल एवं सुचारू रूप से कार्य किया। डॉ. यादव सा. ने अपने कार्यकाल के दौरान संस्थान के उद्देश्य एवं संविधान नियमों की रूपरेखा तैयार की व प्रथम प्रगति-पत्रिका, 2005) के नाम से प्रकाशित करवाया तथा स्व. वर्मा सा. ने अपने करकमलों से इस प्रगति - पत्रिका का विमोचन किया जो संस्थान के संरक्षक थे व उन्होंने सभी सदस्यों को इस पत्रिका के विषय में अवगत कराया एवं सभी सम्मानीय सदस्यों को प्रगति-पत्रिका वितरण की गई |

वर्ष  2005

डॉ. जे. आर. यादव सा. के चार साल अध्यक्षता के पश्चात् श्री बी.डी.यादव को संस्थान का अध्यक्ष चुना गया और उन्होंने अपनी बुद्धिमता व सच्ची लगन के साथ निष्ठापूर्वक दो वर्ष 8 माह तक अध्यक्ष पद पर कार्य किया। इनके कार्यकाल के दौरान संस्थान की प्रगति विवरण पूर्व वार्षिक समारोह-2009 में ही सभी सदस्यों को बतायी जा चुकी है।

वर्ष  2009

श्री बी.डी.यादव जी के दो वर्ष 8 माह अध्यक्षता के उपरोक्त अवधि के पश्चात् श्री जी.बी.सिंह जी को अध्यक्ष एवं श्री अजब सिंह यादव को महासचिव चुना गया। उनके अथक प्रयास से नई ऊर्जावान कार्यकारिणी का गठन किया | इस कार्यकारिणी के कार्यकाल के दौरान निम्नलिखित कार्य किये गये
1. इस संस्था को सर्वप्रथम गैर सरकारी संस्था (NGO) के रूप में उत्तर भारतीय विकास संस्थान के नाम से दिनांक 01.7.2010 को पंजीकृत कराया गया |
2. दिनांक 17.4.2011 को संस्थान द्वारा प्रगति-पत्रिका का प्रकाशन किया गया |
3. उत्तर भारतीय विकास संस्थान की प्रगति-पत्रिका 2011 को महाराणा श्री अरविन्दसिंह जी मेवाड़ द्वारा सिटी पैलेस संग्रहालय में स्थाई रूप से संग्रह कर दिया गया है।

वर्ष  2012

दिनांक 11.03.2012 को संस्थान द्वारा होली, ईद मिलन समारोह टाउन हॉल परिसर में हर्ष-उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ |

वर्ष  2013

दिनांक 10.11.2013 को दीपावली स्नेह मिलन समारोह श्री अजब सिंह यादव के निवास पर सम्पन्न किया गया।
दिनांक 25.8.2013 को संस्थान द्वारा टीडी डेम पर वन भ्रमण एवं सपरिवार के साथ पिकनिक एवं सांस्कृतिक आयोजन का कार्यक्रम रखा गया तथा प्रतिभावान बच्चों को पुरूस्कृत किया गया।
दिनांक 24.2.2013, 05.03.2013, 06.03.2013 को संस्थान द्वारा उदयपुर जिले के विभिन्न राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में निर्धन छात्र, छात्राओं को निशुल्क लेखन-सामग्री व कॉपियाँ आदि वित्तरित की गई तथा वृक्षारोपण का कार्य किया गया साथ ही बेटी बचाओं अभियान (कन्याभ्रूण हत्या रोकने हेतु) की रैली निकाल कर गांवों में लोगों को जागरूक किया गया।

वर्ष  2014

दिनांक 25.03.2014 को संस्थान द्वारा होली, ईद मिलन समारोह टाउन हॉल परिसर में हर्ष-उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ | दिनांक 26.10.2014 को दीपावली स्नेह मिलन समारोह श्री रामसेवक गुप्ता के निवास पर सम्पन्न किया गया। दिनांक 05.10.2014 को संस्थान द्वारा अमरख जी महादेव, सुखेर पर वन भ्रमण एवं सपरिवार के साथ पिकनिक एवं सांस्कृतिक आयोजन का कार्यक्रम रखा गया तथा प्रतिभावान बच्चों को पुरूस्कृत किया गया। दिनांक 20.07.2014, 23.07.2014, 03.08.2014, 12.08.2014 को संस्थान द्वारा उदयपुर जिले के विभिन्न राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में निर्धन छात्र, छात्राओं को निशुल्क लेखन-सामग्री व कॉपियाँ आदि वित्तरित की गई तथा वृक्षारोपण का कार्य किया गया।

वर्ष  2018

श्री जी.बी.सिंह जी के अध्यक्षता के उपरोक्त अवधि के पश्चात् श्री अजब सिंह यादव जी को अध्यक्ष चुना गया। उनके अथक प्रयास से नई ऊर्जावान कार्यकारिणी का गठन किया |
इस कार्यकारिणी के कार्यकाल के दौरान निम्नलिखित कार्य किये गये
1. निशुल्क स्वेटर वितरण
2. निशुल्क किताब कापी वितरण
3. निशुल्क वृक्षारोपण एवं ट्रीगार्ड वितरण
4. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के अंतर्गत सभी का ध्यान आकर्षित किया गया
5. उत्तर भारतीय विकास संस्थान की वेबसाइट लॉन्च करी गयी

संस्थान के पूर्व सदस्य


कार्यकारिणी (1999-2000)

1. संस्थापक संरक्षक - श्री रजनीकांत वर्मा
2. संस्थापक अध्यक्ष - श्री हीरा लाल यादव
3. संरक्षिका - श्रीमती हबीबा बानू

कार्यकारिणी (2001-2005)

1. संस्थापक संरक्षक - श्री रजनीकांत वर्मा
2. संस्थापक अध्यक्ष - श्री हीरा लाल यादव
3. संरक्षिका - श्रीमती हबीबा बानू
4. अध्यक्ष - डॉ. जे.आर. यादव
5. उपाध्यक्ष - श्री एस. के शुक्ला
6. महासचिव - श्री सुभाष कुशवाहा
7. सचिव - श्री रामचंद्र शर्मा, श्रीमती नसीमानीसा
8. कोषाध्यक्ष - श्री श्याम बाबू माथुर
9. प्रवक्ता - श्री ब्रह्मदेव यादव, श्री सुभान अली
10. संगठन सचिव - श्री सी.एस. यादव, श्री अरविन्द कुमार महतो
11. सांस्कृतिक सचिव एवं संपादक - श्री श्याम बिहारी वशिष्ठ, श्री सुरेन्द्र प्रसाद चौधरी
12. कार्यकारिणी सदस्य - श्री एच आर यादव, श्री डी एन बैठा, श्रीमती आसमा बेगम शेख, श्री राजकिशोर तिवारी, श्री हरीश चंद्र मिश्रा, श्री मुन्नी लाल कुशवाहा, श्री राम्यादि कुशवाहा, श्री बशीर अहमद शेख, श्री शिव कुमार पटेल

कार्यकारिणी (2005-2009)

1. संस्थापक संरक्षक - श्री रजनीकांत वर्मा
2. संस्थापक अध्यक्ष - श्री हीरा लाल यादव
3. संरक्षिका - श्रीमती हबीबा बानू
4. अध्यक्ष - श्री ब्रह्मदेव यादव
5. उपाध्यक्ष - श्री एस. के शुक्ला
6. महासचिव - श्री सुभाष कुशवाहा
7. सचिव - श्री रामचंद्र शर्मा, श्रीमती नसीमानीसा
8. कोषाध्यक्ष - श्री श्याम बाबू माथुर
9. प्रवक्ता - श्री सुभान अली
10. संगठन सचिव - श्री सी.एस. यादव, श्री अरविन्द कुमार महतो
11. सांस्कृतिक सचिव एवं संपादक - श्री श्याम बिहारी वशिष्ठ, श्री सुरेन्द्र प्रसाद चौधरी
12. कार्यकारिणी सदस्य - डॉ. जे.आर. यादव, श्री एच आर यादव, श्री डी एन बैठा, श्रीमती आसमा बेगम शेख, श्री राजकिशोर तिवारी, श्री हरीश चंद्र मिश्रा, श्री मुन्नी लाल कुशवाहा, श्री राम्यादि कुशवाहा, श्री बशीर अहमद शेख, श्री शिव कुमार पटेल

कार्यकारिणी (2009-2017)

1. संस्थापक संरक्षक - श्री रजनीकांत वर्मा
2. संस्थापक अध्यक्ष - श्री हीरा लाल यादव
3. संरक्षिका - श्रीमती हबीबा बानू
4. उप-संरक्षक - डॉ. जे.आर. यादव
5. अध्यक्ष - श्री जी.बी. सिंह
6. उपाध्यक्ष - श्री बी.एल. शर्मा, श्री प्रभुदयाल विकल, श्री सुभाष कुशवाहा, श्री अशेशवर साहनी
7. महासचिव - श्री अजब सिंह यादव
8. सचिव - श्री सी.एस. यादव, श्री विजय बहादुर रायजादा
9. कोषाध्यक्ष - श्री रामचंद्र शर्मा
10. सहायक कोषाध्यक्ष - श्री देवेन्द्र कुमार शर्मा
11. प्रवक्ता - श्री आर.के. शर्मा, श्री अहिवरन सिंह पाल
12. विधि सलाहकार - श्री गणेश शंकर तिवारी
13. संगठन सचिव - श्री एस. के. पटेल, श्री जोगेंद्र विश्वकर्मा, डॉ. बी.पी. सिंह
14. सांस्कृतिक सचिव - श्रीमती सर्वेश कुशवाहा, श्रीमती लावण्यप्रभा चतुर्वेदी
15. कार्यकारिणी सदस्य - श्री ब्रह्मदेव यादव,श्री राजदेव शाह, श्री दशरथ यादव, श्री जोध सिंह, श्री सुशील श्रीवास्तव, श्री विजय बहादुर सिंह, श्री योगेश शर्मा, श्री सुभान अली, श्री सरन कुमार आज़ाद, श्री श्याम बाबू माथुर

कार्यकारिणी (2018-2021)

1. संस्थापक संरक्षक - श्री रजनीकांत वर्मा
2. संस्थापक अध्यक्ष - श्री हीरा लाल यादव
3. संरक्षिका - श्रीमती हबीबा बानू
4. उप-संरक्षक - डॉ. जे.आर. यादव, श्री जी.बी. सिंह, डॉ. बी.पी. सिंह, श्री आर.के. शर्मा
5. अध्यक्ष - श्री अजब सिंह यादव
6. उपाध्यक्ष - श्री प्रभुदयाल विकल, श्री यादराम जी, श्री आर.पी. शुक्ला, श्री अशेशवर साहनी
7. महासचिव - श्री एस. के. पटेल
8. सचिव - श्री नत्थी लाल शर्मा, श्री विजय बहादुर रायजादा, श्री सी.एस. यादव, श्री जोगेंद्र विश्वकर्मा
9. कोषाध्यक्ष - श्री रामचंद्र शर्मा
10. सहायक कोषाध्यक्ष - श्री सोनू यादव
11. प्रवक्ता - श्री ब्रह्मदेव यादव
12. सहयोगी प्रवक्ता - श्री बी.एल. शर्मा
13. विधि सलाहकार - श्री गणेश शंकर तिवारी
14. संगठन सचिव - श्री देवेन्द्र कुमार शर्मा, श्री कालीशंकर शुक्ला, श्री सुशील श्रीवास्तव
15. सांस्कृतिक सचिव - श्रीमती सर्वेश कुशवाहा, श्रीमती लावण्यप्रभा चतुर्वेदी
16. कार्यकारिणी सदस्य - श्री राजदेव शाह, श्री दशरथ यादव, श्री जोध सिंह, श्री राजेश यादव, श्री सुधीर भटनागर, श्री सुरेन्द्र सिंह

कार्यकारिणी (2021-वर्तमान)

1. संस्थापक संरक्षक - श्री रजनीकांत वर्मा
2. संस्थापक अध्यक्ष - श्री हीरा लाल यादव
3. संरक्षिका - श्रीमती हबीबा बानू
4. उप-संरक्षक - डॉ. जे.आर. यादव, श्री जी.बी. सिंह, डॉ. बी.पी. सिंह, श्री राम खिलाड़ी शर्मा
5. अध्यक्ष - श्री अजब सिंह यादव
6. उपाध्यक्ष - श्री प्रभुदयाल विकल, श्री यादराम जी, श्री आर.पी. शुक्ला, श्री अशेशवर साहनी
7. महासचिव - श्री एस. के. पटेल
8. सचिव - श्री सी.एस. यादव, श्री जोगेंद्र विश्वकर्मा, श्री रामचंद्र शर्मा, श्री मुशाफीर प्रसाद, श्री राजदेव शाह
9. लेखा परीक्षक - श्री सुशील श्रीवास्तव
10. कोषाध्यक्ष - श्री विजय बहादुर रायजादा
11. सहायक कोषाध्यक्ष - श्री सोनू यादव
12. प्रवक्ता - श्री ब्रह्मदेव यादव, श्री सुभान अली, श्री इंद्रजीत सिंह
13. विधि सलाहकार - श्री गणेश शंकर तिवारी
14. संगठन सचिव - श्री देवेन्द्र कुमार शर्मा, श्री कालीशंकर शुक्ला, श्री राजेश यादव, श्री शिवराम यादव
15. सांस्कृतिक सचिव - श्रीमती सर्वेश कुशवाहा, सुश्री लावण्यप्रभा चतुर्वेदी, श्री विनोद कुमार शर्मा
16. कार्यकारिणी सदस्य - श्री दशरथ यादव, श्री परवीन सिंह, श्री सुधीर भटनागर, श्री सुरेन्द्र सिंह, श्री बिंदा प्रसाद लोध