76, Kalka Mata Mandir Road, Ganesh Nagar, Pahada, Udaipur, Rajasthan - 313001

उत्तर भारतीय संस्थान के सभी सदस्यों को नमस्कार|
मित्रों| आग को प्रज्जलित करने के लिए एक छोटी चिनगारी तो चाहिए ही चाहे वह रसोई के चुल्हे में जलाई जाए या किसी बड़े परिवर्तन के लिए क्रांति के रूप में जलाई जाए। आग चाह छोटी या बडी, जहाँ भी हो अपनी रोशनी और उष्मा का अहसास कराती रहेगी क्योंकि रोशनी और उष्मा ही आग की प्रकृति है। दीपक की लौ चाहे घर के अन्दर ताखे पर जले अथवा हमारे हृदय में जले वह रोशनी तो देगी ही क्योंकि रोशनी उसकी प्रकृति है | हमारी यह प्रगति पंत्रिका एक दीपक की लौ है जिसमें उष्मा और रोशनी दोनों का समन्वय है जो कि हमारे समाज को एक ताकत और एक मार्ग दर्शन दोनों ही प्रदान करती है |
हम सभी जानते हैं कि मनुष्यों एक सामाजिक प्राणी है। मिलना-जुलना, साथ-साथ रहना, हंसना-रोना, प्रेम-मित्रता, दुःख-सुख बाँटना इसका मूल एवं प्राकृतिक स्वभाव है । और यही कारण है कि मनुष्य आदि काल से ही झुंड अथवा समुदाय में रहना पसंद करता है |अपने इसी मौलिक स्वभाव के कारण ही उत्तर भारत के लोगों ने प्रयास किया और उत्तर भारतीय विकास संस्थान की स्थापना हुई | चूँकि मनुष्य बुद्धिजीवी प्राणी है इसलिए उसको मेल-जोल और मित्रता के अतिरिक्त भी कुछ और चाहिए | और इसी अतिरिक्त चाह के अन्तर्गत ही उत्तर भारत के लोगों ने एक दूसरे की सहायता व सहयोग करने का मानस बना लिया ।
अपने अपनों को सामाजिक सुरक्षा देने व उनके सर्वागीण विकास करने का अपने हृदय में जज्बा पैदा कर, इस मेवाड़ की पावन धरती पर अपने सांस्कृतिक, मांगलिक, पारम्परिक रीति-रिवाजों तथा त्यौहारों का सार्वजनिक प्रदर्शन कर सामूहिक रूप से उल्लास, हर्ष तथा गर्व का अनुभव करने लगा। इसके साथ ही मेवाड़ की भद्र और सरल-चित्त जनता के साथ मित्रवत होकर संस्कृतियों व संस्कारों का आदान-प्रदान करने लगा। उत्तर भारतीय विकास संस्थान की यह विकास गाथा हमारी यह प्रगति पत्रिका आपके समक्ष प्रस्तुत करने जा रही है |
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