76, Kalka Mata Mandir Road, Ganesh Nagar, Pahada, Udaipur, Rajasthan - 313001

प्रिय साथियों,
उत्तर भारतीय विकास संस्थान की पत्रिका 'प्रगति' के माध्यम से आप सबसे संवाद करते हुए मुझे हर्ष हो रहा है। हमारी संस्था की यह एक बड़ी खूबी है कि इसमें महिला, पुरुष, बच्चे, बुजुर्ग सभी समान सदस्य. हैं. हमारी संस्था का सदस्य एक महिला या एक पुरुष नहीं होता वरन उसका पूरा परिवार संस्था से सम्बद्ध हो जाता है | ऐसे में, इस पत्रिका में भी सभी के लिए कुछ-न-कुछ सामग्री हैं जो संस्था की तरक्की को आयोजनों के सुगठित समाचारों से आगे ले जाते हुए सदस्य परिवारों की प्रगति से जोड़ती है।
साथियों, सतत् रूप से आगे बढ़ते समाज में अपनी दशा और दिशा पर निरन्तर साझी समझ विकसित की जाती है | यह साझी समझ अलग-अलग दौर के हालात के अनुसार बदलती रहती है और यह बदलाव अपने दौर के हालात को भी प्रभावित करते हैं, इस तरह यह एक पारस्परिक प्रक्रिया है। आज के समय में तकनीकी विकास ने वैश्विक दूरियों को कम किया है तो उसी तकनीक के सहारे अतिवादी सोच रखने वालों को अपने प्रचार-प्रसार का अवसर भी मिला है । एक ओर विभिन्न तबकों में हेलमेल बढ़ा है तो दूसरी ओर जातिगत, धार्मिक, आर्थिक हितों के नाम पर विभेदकारी संगठन भी उठ खड़े हुए हैं। एकपक्षीय, अतिवादी और उग्र विचारों की विशेषता होती है कि वे अचानक चमत्कृत करते हैं, अपनी ओर आकर्षित करते हैं, उस जुनून में बहुत कुछ सही व गलत करवा बैठते हैं और फिर लुप्त हो जाते हैं, किन्तु तब तक मानवता को बहुत नुकसान हो चुका होता है। यह उसी तरह है जैसे कि रोज़ दिखने वाले सूरज, चाँद व तारों की बजाय धूमकेतु हमें अधिक आकर्षित करता है, परन्तु यह कुछ ही समय में गायब हो जाता और अगर कहीं टकरा जाए तो वहाँ जीवन के लिए संकट पैदा कर देता है। ये कहने से मेरा आशय है कि संस्था को वर्तमान दौर की विसंगतियों पर विचार करना चाहिए और अपनी भावी पीढ़ी को खुद को प्रगतिशील सोच विकसित करने के लिए तैयार करना चाहिए |
संस्था परिवार की बेटियों और बेटों के लिए आशीर्वाद है कि वे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें, जीवन में अपने लिए मुकाम तय करें और उन्हें हासिल करें| 'बेटी बचाओ' का अभियान संस्था ने चलाया है और उसके लिए सभी सदस्य प्रतिबद्ध हैं। बेटियों की घटती संख्या के धार्मिक व सामाजिक कारणों के साथ ही आर्थिक कारण भी हैं | इस ओर ध्यान देना चाहिए कि विवाह के खर्च को न्यूनतम कर के और दहेज को समाप्त कर के हम इस अभियान को अधिक सशक्त बना सकते हैं | इस दिशा में, विशेष रूप से, नौजवान लड़कियों व लड़कों से आगे आने का आग्रह करती हूँ।
'प्रगति' के ताज़ा अंक के प्रकाशन के लिए अध्यक्ष श्री जी.बी.सिंह, संपादक मण्डल, रचनाकारों और सभी सहयोगियों को हार्दिक बधाई देती हूँ। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक श्री रजनीकान्त वर्मा एवं प्रथम अध्यक्ष श्री हीरालाल यादव का स्मरण करना चाहती हूँ, जिनकी सोच और अथक प्रयासों से हजारों मील दूर से रोजगार और शिक्षा के लिए उदयपुर आए भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के लोगों को एक मंच प्राप्त हुआ | संस्था के प्रारम्भ से सक्रिय सभी साथियों और इसमें शामिल होने वाले नित नए परिवारों से यही कहना चाहूँगी कि यह संस्था हम सभी की है, यह वैसी ही बनेगी जैसा कि हम इसे बनायेंगे।
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