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या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः ||
सर्व प्रथम उन सभी नारियों को प्रणाम जिन्होंने अन्याय के विरूद्ध अपना मुंह बन्द नहीं रखा और साहस-पूर्वक उसका विरोध किया | उन सभी नारियों को भी प्रणाम जिन्होंने अपनी विद्वता, साहस, वीरता, योग्यता और शक्ति का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वे सभी नारियां भी मानव जाति के लिए आदरणीय है जिन्होंने अपनी बुद्धि, दृढ़ता और संकल्प से इतिहास और नियति को बदल दिया।
भारत का प्राचीन और आधुनिक इतिहास इन प्रणम्य एवं आदरणीय नारियों की गाथा से भरा पड़ा है। जिससे समस्त भारतीय स्वयं को गर्वान्वित महसूस करता है। इन देवियों की गाथा वर्षों से गायी जाती रही है और आगे भी गायी जाती रहेगी |
हम समस्त भारतीय माँ दुर्गा, माँ काली, सती सावित्री, देवी अनुसुय्या, जनक पुत्री सीता, विद्योत्तमा सबरी, रानी लक्ष्मी बाई, मीरा बाई का गुण-गान सदैव से करते आए है और आगे भी इनका नाम अमर रहेगा। आधुनिक भारत के स्व. इंदिरा गांधी, किरण बेदी, मदर टेरेसा, पद्मावती बंधोपाध्याय, प्रतिभा पाटिल, अरुन्धती राय, कल्पना चावला, वीछेन्द्रीपाल, प्रेमलता अग्रवाल, सुमिता लाहा, कैप्टन दुर्बा बैनर्जी, आरती साहा, उज्जवला पाटिल, स्व. निरजा मिश्र, विजया लक्ष्मी पंडित, अरूंधती भट्टाचार्य, चंदा कोचर, ऊषा संगवान, सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल, सुरेखा यादव, लता मंगेशकर, पी.टी.उषा कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने अपने बुद्धि, कौशल और साहस का परचम पूरे विश्व में लहराया है, को केवल भारत ही नहीं पूरा विश्व इनको नाम से पहचानता और जानता है|
माँ दुर्गा, माँ काली और आदि शक्ति माँ सीता जो कि स्वयं महाशक्ति एवं शक्ति पुंज हैं को छोड़ कर ऊपर उल्लिखित सभी महान नारियों के महानता और सफलता के पीछे उनके घरेलू संस्कार, शिक्षा, परिवेश, आत्मबल कठिन परिश्रम, प्रशिक्षण, अभ्यास और नैतिक बल का समन्वय ही उनकी शक्ति बनकर उभरा है |
आज हमें इन महान नारियों का स्मरण करने का कारण यही है कि यदि हम आज भी अपनी बहन-बेटियों को वही शिक्षा, वही संस्कार, वहीं परिवेश, वही आत्मबल,वही प्रशिक्षण और वही नैतिकता प्रदान करें तो शब्द कोष से 'अबला' शब्द हटाना पड़ेगा | और उसकी जगह नारी शक्ति का प्रतीक'सबला' शब्द को स्थापित करना पड़ेगा।
आज के बदलते परिवेष में यह अत्यन्त आवश्यक हो गया है कि प्रत्येक अभिभावक अपनी बहन-बेटियों को अच्छे संस्कार दें, नैतिकता की बातें समझाएं, उनके आत्मबल और साहस को बढ़ाएं, उसे अच्छी से अच्छी और उच्च शिक्षा दिलाएं, आत्मरक्षा के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिलवाएं तथा अन्याय के विरूद्ध मुंह खोलने, खड़े होने तथा लड़ने का हौसला दें | जब तक नारी शक्तिशाली नहीं होगी तब तक लिंग-भेद को मिटाया ही नहीं जा सकता और जब तक स्त्री-पुरूष का भेद समाप्त नहीं होता, समाज में अमन-चैन की स्थापना नहीं हो सकती |
ईश्वर ने स्त्री-पुरूष को अलग-अलग बना कर नहीं भेजा है, उन्हीं पांच तत्वों से ही दोनों को गढ़ा है। एक जैसी आत्मा डाली है तथा एक जैसी ही मूल प्रवृत्तियां एवं भावनाएं दोनों को देकर इस पृथ्वी पर भेजा है। अतः हमें स्त्री-पुरूष में भेद करने का कोई अधिकार ही नहीं है। यदि पुरूष सम्मान चाहता है तो उसे स्त्री का सम्मान करना ही पड़ेगा | मनुष्य अगर खुद को सुखी और खुशहाल रखना चाहता है तो स्त्री को सुखी और खुशहाल रखना ही पड़ेगा इसके अतिरिक्त और कोई रास्ता नहीं है । नीति-शास्त्र में भी कई जगह उल्लेख है जिसका आशय है कि जिस परिवार में पत्नी, माँ-बहन, बेटी तथा साथ में रहने वाली सभी महिलाओं का भरण-पोषण और खुशहाली का विशेष ध्यान रखा जाता है उस घर में लक्ष्मी स्वयं विराजती है तथा कलह का कभी भी प्रवेश नहीं होता है|
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